अजय की बेटी ने खोला पुलिस का सच, कहा शर्म करो पटना पुलिस

 


पटना। पटना पुलिस का इकबाल कैसा है, प्रखंड कृषि पदाधिकारी (बीएओ) की बेटी ने एसएसपी को लिखे अपने पत्र में खोल दिया। 18 जनवरी को प्रखंड कृषि पदाधिकारी अजय कुमार का घर से मसौढ़ी जाने के क्रम में अपहरण कर लिया गया था। रविवार को उनका शव मिला है। उनकी बेटी स्नेहलता अपने पिता के अपहरण से जुड़े साक्ष्य दिखाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव, पिछले चुनाव में स्वघोषित सीएम प्रत्याशी पुष्पम प्रिया, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के साथ-साथ आईपीएस अधिकारियों और केंद्रीय गृह मंत्रालय तक पुलिस के रवैए पर " सेम ऑन बिहार पुलिस " का मैसेज भेजती रही। पुलिस-प्रशासन को किसी अनहोनी से सर्तक रहने के लिए  लिखती रही कि जहां सरकारी अधिकारी की रक्षा संभव नहीं, वहां आम आदमी का क्या होगा? लेकिन, किसी पर कोई फर्क नहीं पड़ा और अन्ततः रविवार को अजय कुमार की लाश मिली। राजधानी पटना के कंकड़बाग थाना क्षेत्र के चांदमारी रोड में अजय कुमार रहते थे। 18 जनवरी को वे अपने घर से  पटना जिले के ही मसौढ़ी में ड्यूटी के लिए निकले थे, लेकिन फिर अजय कुमार का कुछ पता नहीं चल पाया था। 

बीएओ पदाधिकारी की बेटी ने अपने लिखे पत्र के माध्यम से कहा था कि मेरे पिता अजय कुमार चार दिनों से लापता हैं। वह मसौढ़ी ब्लॉक में प्रखंड विकास अधिकारी के पद पर तैनात हैं। हमेशा की तरह वह ट्रेन से 18 जनवरी को सुबह 7:30 बजे पटना से अपने कार्यालय के लिए निकले थे, लेकिन वहां नहीं पहुंचे। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, उनके फोन का केवल अंतिम लोकेशन 'सरमा' गांव (मसौढ़ी से 1 किलोमीटर की दूरी पर) में मिला था। एक आदमी का नाम 'गोलू' है। वह संजय कुमार नाम के किसी डीलर का बेटा है। उसे कुछ वाउचर जमा करना था, जिसे वह लंबे समय से जमा नहीं कर रहा था। मेरे पिता को भी किसी को जवाब देना होता है, इसलिए उन्होंने उसे वाउचर जमा करने का दबाव बनाया था। मेरे पिता 18 जनवरी को 1 महीने के बाद अपने कार्यालय में जा रहे थे। वह ट्रेन से मसौढ़ी के रास्ते में थे तो गोलू ने उन्हें फोन किया, सिर्फ यह पूछने के लिए वह कहां हैं या कब तक पहुंच रहे हैं। मेरे पिता के कॉल रिकॉर्ड के अनुसार अंतिम कॉल गोलू का ही था। फिर कुछ समय के बाद उनका फोन 3 घंटे के लिए बंद हो गया। 

फिर 1 दिन तक स्विच ऑन रहा (चूंकि वह शाम तक नहीं लौटे तो हमने उनके नंबर पर कॉल करने का प्रयास किया था, इसलिए यह पता है) फिर अगले दिन फोन बंद हो गया। हमें गोलू पर पूरा शक है। हमारे पास कुछ सबूत हैं, लेकिन पुलिस उसपर कोई और जांच नहीं कर रही है। हम कई बार पुलिस अधिकारियों, डीएसपी और एसपी के पास गए, लेकिन कोई भी उसपर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। वे हमारी बात नहीं सुन रहे हैं। मुझे लगता है कि इन दिनों एफआईआर या पुलिस अधिकारियों का कोई उपयोग नहीं है। बस, कुछ पैसे के लिए उनका मुंह बंद है। कुछ बेशर्म लोग हैं, जो परिवार के बारे में नहीं सोचते हैं। यह किसी के साथ भी हो सकता है। 4 दिन हो गए हैं और न ही पुलिस ने मेरे पिता के मोबाइल फोन को खंगालने की कोशिश की है, न ही कोई सुराग ढूंढ सकी है।हमें न्याय चाहिए! बिहार पुलिस पर शर्म करो! 

यह खबर भी पढ़े: लीग मैच में फायरबाल्स और बीडब्ल्यूसीए की टीम रही विजयी

From around the web